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हमेशा सकारात्मक सोचें और खुश रहें ।। सकारात्‍मक सोच ही सफलता की कुंजी है

  समय कभी रुकता नहीं है, वह निरंतर चलता रहता है। उसी तरह सफलता व असफलता, मुसीबत और हल, जीत और हार, सुख और दुख, ये सब जीवन के पड़ाव है और हमेशा आते जाते रहते है। इंसान जब दुख, संकट या  मुश्किल समय से गुजर रहा होता है या परिस्थितियों विपरीत चल रही होती है, तब नकारात्मक भाव से घिर जाता है। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में इंसान को धैर्य और शांत मन से विचार कर समस्या से कैसे पार पाया जाए या सामना किया जाए ये सोचना चाहिए। नकारात्मक भाव या विपरीत परिस्थितियों का बुद्धिमता व धैर्यता से सामना करना ही सकारात्मकता है। सकारात्मकता से ही विश्व में बड़े बड़े युद्ध लड़े गए और जीते गए है। अगर, पर्वतारोही  पर्वत की ऊँचाई को देखकर यह सोच लें की वह तो इतनी ऊंची और कठिन पहाड़ी को चढ़ी नहीं सकता, तो जो कीर्तिमान पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट जैसी पहाड़ियों को चढ़ कर हासिल किया है, वो कभी भी हासिल नहीं हो सकता था। सकारात्मक सोच आपको हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देगी, सुख और दुख, मुसीबत और हल, जीत और हार यह सब जीवन में आता जाता रहता है। जरूरी है, आप खुद पर विश्वास रखें, अपने हितेसियों से बात करें, कर्मशील बन...

व्यायाम

 




शरीर को चुस्त-दुरुस्त तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए व्यायाम बहुत ही जरूरी है सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए इसमें अलग-अलग तरह से व्यायाम समय तय कर सकते हैं व्यायाम सुबह-सुबह करने के बहुत ही फायदे होते हैं। शरीर को तंदुरुस्त मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए व्यायाम जैसे चलना दौड़ना दंड बैठक लगाना खेल खेलना तैरना, ध्यान लगाना इत्यादि नियमितरूप से करना चाहिए। व्यायाम करने से जोड़ों में दर्द, श्वास की बीमारी, बदन दर्द, थकान, आलस, तनाव इत्यादि को नियंत्रित किया जा सकता है।  व्यायाम करने से हम शरीर को फुर्तीला, तंदुरुस्त ओर निरोगी बनाये रह सकते हैं। साथ ही अपने आप को तनाव रहित खुश भी रह सकते हैं। यह शारीरिक तथा मानसिक दोनों ही के लिए लाभदायक है। पौराणिक कथाओं में भी व्यायाम का बहुत ही महत्व दिखाया गया है। भारत में पौराणिक काल में भी गुरु इनकी शिक्षा दिया करते थे। भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने खुद के लिए अगर एक से डेढ़ घंटा व्यायाम करने के लिए दे तो निश्चित ही लाभकारी होगा।




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योग व योगासन

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हमेशा सकारात्मक सोचें और खुश रहें ।। सकारात्‍मक सोच ही सफलता की कुंजी है

  समय कभी रुकता नहीं है, वह निरंतर चलता रहता है। उसी तरह सफलता व असफलता, मुसीबत और हल, जीत और हार, सुख और दुख, ये सब जीवन के पड़ाव है और हमेशा आते जाते रहते है। इंसान जब दुख, संकट या  मुश्किल समय से गुजर रहा होता है या परिस्थितियों विपरीत चल रही होती है, तब नकारात्मक भाव से घिर जाता है। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में इंसान को धैर्य और शांत मन से विचार कर समस्या से कैसे पार पाया जाए या सामना किया जाए ये सोचना चाहिए। नकारात्मक भाव या विपरीत परिस्थितियों का बुद्धिमता व धैर्यता से सामना करना ही सकारात्मकता है। सकारात्मकता से ही विश्व में बड़े बड़े युद्ध लड़े गए और जीते गए है। अगर, पर्वतारोही  पर्वत की ऊँचाई को देखकर यह सोच लें की वह तो इतनी ऊंची और कठिन पहाड़ी को चढ़ी नहीं सकता, तो जो कीर्तिमान पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट जैसी पहाड़ियों को चढ़ कर हासिल किया है, वो कभी भी हासिल नहीं हो सकता था। सकारात्मक सोच आपको हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देगी, सुख और दुख, मुसीबत और हल, जीत और हार यह सब जीवन में आता जाता रहता है। जरूरी है, आप खुद पर विश्वास रखें, अपने हितेसियों से बात करें, कर्मशील बन...

भोजन करने का तरीका

  इस आधुनिक समय में ज्यादातर लोग भोजन करने का सही तरीका नहीं अपना रहे हैं। भोजन करते समय टीवी देखना, मोबाइल चलाना, लाउडस्पीकर में म्यूजिक सुनना, बार बार पानी पीना, खाने में जंक फूड खाना, ज्यादा तेल, नमक व मिर्च वाला भोजन करना, ज्यादा गरम गरम भोजन करना, जल्दी-जल्दी खाना इत्यादि गलत तरीकों से शरीर को भोजन से लाभ नहीं होता और न ही भोजन सही से पच पाता है। भोजन से आपके शरीर को लाभ हो व आसानी से पच जाए, इसके लिए भोजन करने का तरीका सही होना बहुत ही आवश्यक है।  भोजन को दिन में कम से कम तीन बार में खाना चाहिए और दो अंतराल के बीच कम से कम 4 से 5 घंटे का समय जरूर होना चाहिए।  भोजन हमेशा सही समय और भूख लगने पर करना चाहिए। सबसे जरूरी है, भोजन को अच्छी तरह चबा चबाकर खाना चाहिए और खाते समय बात नहीं करनी चाहिए। सादा व पौष्टिक भोजन करें और खाने के साथ सलाद ज्यादा से ज्यादा खाएं। सुबह नाश्ते के पहले या नाश्ते के साथ, फल और अंकुरित अनाज खाने चाहिए। ज्यादा तेल,  नमक मिर्च  व ज्यादा  मीठा  खाना कम से कम खाना चाहिए। भोजन करते समय बार बार पानी नहीं पीना चाहिए और खा...

प्रकृति और स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवन, प्राकृतिक जीवन

  मानव शरीर प्रकृति के पंचतत्व पानी, भूमि, आकाश और अग्नि से मिलकर बना है और अंततः इसी में विलीन हो जाता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि वन में आश्रम में रहकर प्रकृति के स्वच्छ वातावरण में रहकर अपना जीवन व्यतीत करते थे और उनका जीवन स्वस्थ, निरोगी व दीर्घायु होता था। मानव जितना प्रकृति के साथ जीवन का समय व्यतीत करेगा उतना ही उसके स्वास्थ्य के लिए यह लाभदायक होगा। जिस तरह प्राचीन काल में ऋषि मुनि  दिनचर्या का सही से सही समय पर पालन करते थे जैसे समय पर जागना, सोना, ध्यान करना, सही समय पर खाना खाना, व्यायाम करना इत्यादि वो अपने जीवन में विशेष रुप से पालन करते थे। पेड़ पौधों के बीच रहकर के स्वच्छ हवा  में श्वास लेना , स्वस्थ वातावरण  में रहना  और प्राकृतिक ताजे फल खाते थे। आजकल की इस व्यस्त जिंदगी में मानव स्वच्छ वातावरण में सुबह और शाम को टहलने मात्र का समय निकालना भी मुश्किल हो गया है। ज्यादा संसाधनों (वाहन, एअर कंडीशनर इत्यादि)  और कम पेड़ पौधों या पेड़ पौधों की कमी/कटाई से स्वच्छ वातावरण दूषित होता जा रहा है और मानव प्राकृतिक जीवन से दूर होता जा रहा है। प्र...

पौष्टिक व संतुलित आहार

  एक स्वस्थ व तंदुरुस्त शरीर के लिए पौष्टिक व संतुलित आहार का बड़ा महत्व होता है। आहार मैं क्या खाना चाहिए होना, कितना होना चाहिए, किस समय खाना चाहिए इत्यादि बातों पर निर्भर करता है।  आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और जीवनशैली के कारण ना हम संतुलित आहार का ध्यान रख पाते हैं और नहीं समय पर खाने का; इसके परिणाम स्वरूप शरीर व स्वास्थ्य पर कई प्रकार के दुष्प्रभाव होते हैं। संतुलित व पौष्टिक आहार का मतलब के शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व, प्रोटींस, आयरन व कैल्शियम व विटामिंस जरूरी मात्रा में मिल सके। पौष्टिक आहार मतलब की ऐसा खानपान जो आपके शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व: प्रोटींस, आयरन और कैल्शियम, विटामिंस, कार्बोहाइड्रेट्स, मिनरल्स इत्यादि सभी को संतुलित मात्रा में शरीर में बना के रखे। इन सभी की पूर्ति के लिए आपको विभिन्न तरह के फल, सब्जी-रोटी, दाल-चावल के साथ सलाद, दुध व अन्य पौष्टिक तरल पदार्थ, मौसमी फल और सब्जियां खाते रहना चाहिए। पौष्टिक व संतुलित आहार के विभिन्न लाभ है; बच्चों को यह कुपोषण से दूर रखता है, यह खून मैं जरूरी तत्वों को संतुलित रखता है, हड्डियो दातों को मजबूत बनाकर रख...

भोजन के बाद टहलना क्यों जरूरी है?

  इस भागदौड़ भरी जिंदगी मे काम की व्यस्थता के कारण, इंसान ना तो समय पर भोजन कर पाता है और ना ही भोजन के बाद टहल पाता है। अधिकांश लोग दिनभर की थकावट के कारण रात के भोजन के बाद सुस्त महसूस करते हैं और आराम करना चाहते है। लेकिन भोजन के बाद टहलना कितना जरूरी है और फायदेमंद है, यह समझना बहुत ही जरूरी है। भोजन के बाद रोज कम से कम 15 से 20 मिनट जरूर टहलना चाहिए और अगर आप ज्यादा टहल सकते हैं तो यह ओर भी फायदेमंद होगा। आप दोपहर के भोजन के बाद नहीं टहल सकते हैं तो शाम के भोजन के बाद जरूर टहलना चाहिए। नियमित टहलने से आप अनेक सेहत संबंधित समस्याओं से बच सकते हैं और खुद को स्वस्थ तंदुरुस्त रख सकते हैं।  आइए जानते हैं, भोजन के बाद टहलना क्यों जरूरी है?   टहलने (पैदल चलने) से पाचन तंत्र मजबूत होता है और पाचन संबंधित समस्याएं कम होती हैं। भोजन के बाद टहलने से कब्ज, गैस और ऐसी अन्य समस्याएं नहीं होती है और मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है।  भोजन के बाद टहलने से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है। अगर आप वजन को नियंत्रित रखना चाहते हैं या कम करना चाहते हैं तो सुबह-शाम भोजन के बाद 20 से 40 ...

समय पर सोना और जागना

  समय पर सोना बहुत ही आवश्यक है और सुबह जल्दी उठना भी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। 6 से 8 घंटे की नींद लेना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, इससे शरीर व दिमाग को आराम मिलता है। रात को देर तक जगना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है व दिमाग पर भी इसका बुरा असर पड़ता है और व्यवहार में  चिड़चिड़ापन आना और बदलाव आना इसका उदाहरण हो सकता है। रात को जल्दी सोने से आप 6 से 8 घंटे की नींद आराम से ले सकते हैं और सुबह जल्दी भी उठ सकते हैं। सुबह जल्दी उठकर आप व्यायाम, योग, मेडिटेशन, ताजी हवा में सांस, सूरज की धूप इत्यादि कर सकते हैं। सुबह उठकर आप प्राकृतिक रूप से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण कर सकते हैं, इसीलिए यह उचित है कि आप समय पर सोएं और जल्दी उठकर प्राकृतिक ऊर्जा का लाभ ले। सुबह जल्दी उठकर आप अपने आप को फिट रखने के लिए व्यायाम मॉर्निंग वॉक करें ओर मन को एकाग्र व शांत रखने के लिए योग और मेडिटेशन कर सकते हैं, एक   खुशहाल, सेहतमंद और सफल जीवन के लिए यह एक यह एक कारगर आदत हो सकती है। अतः आप सुबह उठकर सकारात्मक उर्जा का आनंद व लाभ ले सकते हैं और तनाव को कम कर सकते हैं।

खुशहाल एवं सेहतमंद कैसे बने

  इस आधुनिककाल में ज़िन्दगी; भगदौड़ और तनाव से भरी हुई है। जिन्दंगी को सेहतमंद व ख़ुशहाल बनाने के लिए हमें कुछ अच्छी आदतों को अपने जीवन में अपनाना व उसका नियमित पालन करना होगा, तभी हम सुव्यवस्थित तरीके से सफल, निरोगी व सुखी जीवन जी सकते है। शारारिक समस्याओं एवं मानशिक तनाव को कैसे कम या संतुलित किया जाये, इसके लिए भी प्रयास इन्ही अच्छी आदतों को अपना के किया जा सकता है।  जैसे कि समय पर काम पूरा करना, अच्छा खानपान, अच्छी किताबे पड़ना, अपने आप को समय के साथ नई स्किल्स के लिए तैयार करना, हर दिन व्यायाम करना, सही समय पर सोना जागना, योग करना, काम के प्रति ईमानदारी, लोगो के प्रति सम्मान, सहानुभूति एवं विनम्रता का भाव , पारिवारिक व  सामाजिक जुडाव, अच्छी संगत, इत्यादि।  निम्नलिखित अच्छी आदतों को नियमितरूप से अपनाकर अपने जीवन को खुशहाल एवं सेहतमंद बना सकते है।  

भोजन करने का टाइम टेबल

आजकल की व्यस्थतम जिंदगी में हम काम करते-करते सही समय पर भोजन भी नहीं कर पाते हैं। समय पर खाना ना खाना स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक हो सकता है इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। पौष्टिक आहार सही समय पर खाने से ही इंसान स्वस्थ और निरोगी रह सकता है। दिन भर के भोजन को कम से कम तीन अंतराल में खाना चाहिए। सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन और शाम का भोजन और हर अंतराल के बीच कम से कम 4 घंटे का समय होना चाहिए। सुबह का नाश्ता उठने के एक से डेढ़ घंटे के अंदर और सुबह 9:00 बजे के पहले कर लेना अति उत्तम होता है। सुबह का नाश्ता ज्यादा और प्रोटीन युक्त होना चाहिए। दोपहर का भोजन 12:30 से 1:00 बजे की बीच में करना अच्छा होता है। दोपहर में दाल रोटी सब्जी चावल के साथ सलाद खाना चाहिए। दोपहर के भोजन में मध्यम मात्रा में भोजन खाना चाहिए चाहिए।  दोपहर में ज्यादा भोजन खाने से काम में आलस आता है। बताया जाता है कि रात का भोजन सूरज डूबने के पहले तक खा लेना चाहिए अर्थात रात का भोजन 6:30 से 7:30 बजे तक खा लेना चाहिए। रात का खाना अल्प मात्रा में खाना चाहिए और हल्का व आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए। रात के भोजन और स...