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मार्च, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हमेशा सकारात्मक सोचें और खुश रहें ।। सकारात्‍मक सोच ही सफलता की कुंजी है

  समय कभी रुकता नहीं है, वह निरंतर चलता रहता है। उसी तरह सफलता व असफलता, मुसीबत और हल, जीत और हार, सुख और दुख, ये सब जीवन के पड़ाव है और हमेशा आते जाते रहते है। इंसान जब दुख, संकट या  मुश्किल समय से गुजर रहा होता है या परिस्थितियों विपरीत चल रही होती है, तब नकारात्मक भाव से घिर जाता है। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में इंसान को धैर्य और शांत मन से विचार कर समस्या से कैसे पार पाया जाए या सामना किया जाए ये सोचना चाहिए। नकारात्मक भाव या विपरीत परिस्थितियों का बुद्धिमता व धैर्यता से सामना करना ही सकारात्मकता है। सकारात्मकता से ही विश्व में बड़े बड़े युद्ध लड़े गए और जीते गए है। अगर, पर्वतारोही  पर्वत की ऊँचाई को देखकर यह सोच लें की वह तो इतनी ऊंची और कठिन पहाड़ी को चढ़ी नहीं सकता, तो जो कीर्तिमान पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट जैसी पहाड़ियों को चढ़ कर हासिल किया है, वो कभी भी हासिल नहीं हो सकता था। सकारात्मक सोच आपको हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देगी, सुख और दुख, मुसीबत और हल, जीत और हार यह सब जीवन में आता जाता रहता है। जरूरी है, आप खुद पर विश्वास रखें, अपने हितेसियों से बात करें, कर्मशील बन...

हमेशा सकारात्मक सोचें और खुश रहें ।। सकारात्‍मक सोच ही सफलता की कुंजी है

  समय कभी रुकता नहीं है, वह निरंतर चलता रहता है। उसी तरह सफलता व असफलता, मुसीबत और हल, जीत और हार, सुख और दुख, ये सब जीवन के पड़ाव है और हमेशा आते जाते रहते है। इंसान जब दुख, संकट या  मुश्किल समय से गुजर रहा होता है या परिस्थितियों विपरीत चल रही होती है, तब नकारात्मक भाव से घिर जाता है। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में इंसान को धैर्य और शांत मन से विचार कर समस्या से कैसे पार पाया जाए या सामना किया जाए ये सोचना चाहिए। नकारात्मक भाव या विपरीत परिस्थितियों का बुद्धिमता व धैर्यता से सामना करना ही सकारात्मकता है। सकारात्मकता से ही विश्व में बड़े बड़े युद्ध लड़े गए और जीते गए है। अगर, पर्वतारोही  पर्वत की ऊँचाई को देखकर यह सोच लें की वह तो इतनी ऊंची और कठिन पहाड़ी को चढ़ी नहीं सकता, तो जो कीर्तिमान पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट जैसी पहाड़ियों को चढ़ कर हासिल किया है, वो कभी भी हासिल नहीं हो सकता था। सकारात्मक सोच आपको हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देगी, सुख और दुख, मुसीबत और हल, जीत और हार यह सब जीवन में आता जाता रहता है। जरूरी है, आप खुद पर विश्वास रखें, अपने हितेसियों से बात करें, कर्मशील बन...

क्यों हँसते-मुस्कुरातें रहना चाहिये ?/ हँसने के फायदे

  जीवन में हँसने-मुस्कुराने के अनेक लाभ है। एक अनजाने व्यक्ति के लिए आपकी एक मुस्कान ही आपकी पहचान होती है और एक मुस्कान ही आपकी चेहरे की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है। हँसने-मुस्कुराने से तनाव दूर होता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और इससे क्रोध भी कम होता है। छोटे बच्चे की एक मुस्कुराहट से माता पिता का मन खिल उठता है। हँसने मुस्कुराने से शरीर में ऑक्सीजन का संचार ज्यादा होता है और आपके शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है। हँसना-मुस्कुराना तनाव व डिप्रेशन के लिए दवाई की तरह काम करती है। हँसने से ब्लड प्रेशर कम होता है। अगर आप हर रोज़ हँसते  मुस्कुराते है या नियमित हास्य योग करते हैं तो आपकी आयु भी लंबी होती है और हार्ट अटैक या ह्रदय संबंधित अन्य बीमारियों से बचा जा सकता है। अतः आपको हमेशा हँसते-मुस्कुराते रहना चाहिए और इस दवाई का लाभ लेना चाहिए।

प्रकृति और स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवन, प्राकृतिक जीवन

  मानव शरीर प्रकृति के पंचतत्व पानी, भूमि, आकाश और अग्नि से मिलकर बना है और अंततः इसी में विलीन हो जाता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि वन में आश्रम में रहकर प्रकृति के स्वच्छ वातावरण में रहकर अपना जीवन व्यतीत करते थे और उनका जीवन स्वस्थ, निरोगी व दीर्घायु होता था। मानव जितना प्रकृति के साथ जीवन का समय व्यतीत करेगा उतना ही उसके स्वास्थ्य के लिए यह लाभदायक होगा। जिस तरह प्राचीन काल में ऋषि मुनि  दिनचर्या का सही से सही समय पर पालन करते थे जैसे समय पर जागना, सोना, ध्यान करना, सही समय पर खाना खाना, व्यायाम करना इत्यादि वो अपने जीवन में विशेष रुप से पालन करते थे। पेड़ पौधों के बीच रहकर के स्वच्छ हवा  में श्वास लेना , स्वस्थ वातावरण  में रहना  और प्राकृतिक ताजे फल खाते थे। आजकल की इस व्यस्त जिंदगी में मानव स्वच्छ वातावरण में सुबह और शाम को टहलने मात्र का समय निकालना भी मुश्किल हो गया है। ज्यादा संसाधनों (वाहन, एअर कंडीशनर इत्यादि)  और कम पेड़ पौधों या पेड़ पौधों की कमी/कटाई से स्वच्छ वातावरण दूषित होता जा रहा है और मानव प्राकृतिक जीवन से दूर होता जा रहा है। प्र...

भोजन के बाद टहलना क्यों जरूरी है?

  इस भागदौड़ भरी जिंदगी मे काम की व्यस्थता के कारण, इंसान ना तो समय पर भोजन कर पाता है और ना ही भोजन के बाद टहल पाता है। अधिकांश लोग दिनभर की थकावट के कारण रात के भोजन के बाद सुस्त महसूस करते हैं और आराम करना चाहते है। लेकिन भोजन के बाद टहलना कितना जरूरी है और फायदेमंद है, यह समझना बहुत ही जरूरी है। भोजन के बाद रोज कम से कम 15 से 20 मिनट जरूर टहलना चाहिए और अगर आप ज्यादा टहल सकते हैं तो यह ओर भी फायदेमंद होगा। आप दोपहर के भोजन के बाद नहीं टहल सकते हैं तो शाम के भोजन के बाद जरूर टहलना चाहिए। नियमित टहलने से आप अनेक सेहत संबंधित समस्याओं से बच सकते हैं और खुद को स्वस्थ तंदुरुस्त रख सकते हैं।  आइए जानते हैं, भोजन के बाद टहलना क्यों जरूरी है?   टहलने (पैदल चलने) से पाचन तंत्र मजबूत होता है और पाचन संबंधित समस्याएं कम होती हैं। भोजन के बाद टहलने से कब्ज, गैस और ऐसी अन्य समस्याएं नहीं होती है और मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है।  भोजन के बाद टहलने से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है। अगर आप वजन को नियंत्रित रखना चाहते हैं या कम करना चाहते हैं तो सुबह-शाम भोजन के बाद 20 से 40 ...

भोजन करने का तरीका

  इस आधुनिक समय में ज्यादातर लोग भोजन करने का सही तरीका नहीं अपना रहे हैं। भोजन करते समय टीवी देखना, मोबाइल चलाना, लाउडस्पीकर में म्यूजिक सुनना, बार बार पानी पीना, खाने में जंक फूड खाना, ज्यादा तेल, नमक व मिर्च वाला भोजन करना, ज्यादा गरम गरम भोजन करना, जल्दी-जल्दी खाना इत्यादि गलत तरीकों से शरीर को भोजन से लाभ नहीं होता और न ही भोजन सही से पच पाता है। भोजन से आपके शरीर को लाभ हो व आसानी से पच जाए, इसके लिए भोजन करने का तरीका सही होना बहुत ही आवश्यक है।  भोजन को दिन में कम से कम तीन बार में खाना चाहिए और दो अंतराल के बीच कम से कम 4 से 5 घंटे का समय जरूर होना चाहिए।  भोजन हमेशा सही समय और भूख लगने पर करना चाहिए। सबसे जरूरी है, भोजन को अच्छी तरह चबा चबाकर खाना चाहिए और खाते समय बात नहीं करनी चाहिए। सादा व पौष्टिक भोजन करें और खाने के साथ सलाद ज्यादा से ज्यादा खाएं। सुबह नाश्ते के पहले या नाश्ते के साथ, फल और अंकुरित अनाज खाने चाहिए। ज्यादा तेल,  नमक मिर्च  व ज्यादा  मीठा  खाना कम से कम खाना चाहिए। भोजन करते समय बार बार पानी नहीं पीना चाहिए और खा...

भोजन करने का टाइम टेबल

आजकल की व्यस्थतम जिंदगी में हम काम करते-करते सही समय पर भोजन भी नहीं कर पाते हैं। समय पर खाना ना खाना स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक हो सकता है इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। पौष्टिक आहार सही समय पर खाने से ही इंसान स्वस्थ और निरोगी रह सकता है। दिन भर के भोजन को कम से कम तीन अंतराल में खाना चाहिए। सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन और शाम का भोजन और हर अंतराल के बीच कम से कम 4 घंटे का समय होना चाहिए। सुबह का नाश्ता उठने के एक से डेढ़ घंटे के अंदर और सुबह 9:00 बजे के पहले कर लेना अति उत्तम होता है। सुबह का नाश्ता ज्यादा और प्रोटीन युक्त होना चाहिए। दोपहर का भोजन 12:30 से 1:00 बजे की बीच में करना अच्छा होता है। दोपहर में दाल रोटी सब्जी चावल के साथ सलाद खाना चाहिए। दोपहर के भोजन में मध्यम मात्रा में भोजन खाना चाहिए चाहिए।  दोपहर में ज्यादा भोजन खाने से काम में आलस आता है। बताया जाता है कि रात का भोजन सूरज डूबने के पहले तक खा लेना चाहिए अर्थात रात का भोजन 6:30 से 7:30 बजे तक खा लेना चाहिए। रात का खाना अल्प मात्रा में खाना चाहिए और हल्का व आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए। रात के भोजन और स...

पौष्टिक व संतुलित आहार

  एक स्वस्थ व तंदुरुस्त शरीर के लिए पौष्टिक व संतुलित आहार का बड़ा महत्व होता है। आहार मैं क्या खाना चाहिए होना, कितना होना चाहिए, किस समय खाना चाहिए इत्यादि बातों पर निर्भर करता है।  आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और जीवनशैली के कारण ना हम संतुलित आहार का ध्यान रख पाते हैं और नहीं समय पर खाने का; इसके परिणाम स्वरूप शरीर व स्वास्थ्य पर कई प्रकार के दुष्प्रभाव होते हैं। संतुलित व पौष्टिक आहार का मतलब के शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व, प्रोटींस, आयरन व कैल्शियम व विटामिंस जरूरी मात्रा में मिल सके। पौष्टिक आहार मतलब की ऐसा खानपान जो आपके शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व: प्रोटींस, आयरन और कैल्शियम, विटामिंस, कार्बोहाइड्रेट्स, मिनरल्स इत्यादि सभी को संतुलित मात्रा में शरीर में बना के रखे। इन सभी की पूर्ति के लिए आपको विभिन्न तरह के फल, सब्जी-रोटी, दाल-चावल के साथ सलाद, दुध व अन्य पौष्टिक तरल पदार्थ, मौसमी फल और सब्जियां खाते रहना चाहिए। पौष्टिक व संतुलित आहार के विभिन्न लाभ है; बच्चों को यह कुपोषण से दूर रखता है, यह खून मैं जरूरी तत्वों को संतुलित रखता है, हड्डियो दातों को मजबूत बनाकर रख...

योग व योगासन

  योग शरीर, मन व भावनाओं में सामंजस्य और इनको संतुलित करने का साधन है। प्राचीन काल से योग का उपयोग शरीर व मन को संतुलित करने व साधने में होता आ रहा है। स्वस्थ व तंदुरुस्त शरीर के अलावा मानसिक संतुलन व आध्यात्मिक स्तर को प्राप्त करने में भी लाभकारी है। योग करने से मांसपेशियां मजबूत होती है, लोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है, स्वतंत्र मजबूत होता है, वही श्वास की गति पर नियंत्रण किया जा सकता है, योग से खून के दबाव को भी नियंत्रित किया जा सकता है। योग सूर्यास्त या सूर्योदय के समय खाली पेट और शुद्ध व खुले वातावरण में किया जाए तो बहुत ही लाभकारी होता है। ध्यान योग करने के लिए आसपास का वातावरण शांत होना आवश्यक है। सुबह-सुबह ताजी हवा में प्राणायाम करने से श्वसन तंत्र से संबंधित बीमारियां जैसे दमा, नजला, जुकाम, साइनोसाइटिस, फेफड़ों से संबंधित अन्य बीमारियां इत्यादि में लाभ मिलता है। योग करने से सहनशक्ति व धैर्य बढ़ता है और तनाव कम होता है। इस तनावपूर्ण व भागदौड़ भरी जिंदगी में योग करना बहुत ही आवश्यक व लाभदायक है। शुरुआत में वही योगासन करना चाहिए जो आप कर सकते हैं और उतने ही समय के लिए योग क...

व्यायाम

  शरीर को चुस्त - दुरुस्त व तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए व्यायाम बहुत ही जरूरी है सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए इसमें अलग - अलग तरह से व्यायाम व समय तय कर सकते हैं । व्यायाम सुबह - सुबह करने के बहुत ही फायदे होते हैं। शरीर को तंदुरुस्त व मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए व्यायाम जैसे चलना दौड़ना दंड बैठक लगाना खेल खेलना तैरना , ध्यान लगाना इत्यादि नियमितरूप से करना चाहिए। व्यायाम करने से जोड़ों में दर्द , श्वास की बीमारी , बदन दर्द , थकान , आलस , तनाव इत्यादि को नियंत्रित किया जा सकता है।   व्यायाम करने से हम शरीर को फुर्तीला , तंदुरुस्त ओर निरोगी बनाये रह सकते हैं। साथ ही अपने आप को तनाव रहित व खुश भी रह सकते हैं। यह शारीरिक तथा मानसिक दोनों ही के लिए लाभदायक है। पौराणिक कथाओं में भी व्यायाम का बहुत ही महत्व दिखाया गया है। भारत में पौराणिक काल में भी गुरु इनकी शिक्षा दिया करते थे। भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने खुद के लिए अगर ...